हम आपको एक ऐसी सच्चाई दिखाने जा रहे हैं, जो सोचने पर मजबूर कर देगी. क्या कभी आपने सोचा है कि हमारे और आपके परिवारों की रक्षा जिन सैनिकों के भरोसे होती है, उन सैनिकों के माता-पिता को कितना संघर्ष पड़ता है. मजबूत कलेजा रखने वाले माता-पिता अपने बेटों को देश के लिए कुर्बान करते हैं, लेकिन माता-पिता को न तो सम्मान मिला और न ही सेना सुनवाई कर रही है. सरकार की तरफ से जो मदद मिली, वो शहीद की पत्नी को मिली. अब परिवार का सवाल है कि जिस पत्नी को हक मिला है, उसे परिवार की जिम्मेदारी भी दी जानी चाहिए. शहीदों के ऐसे माता-पिता ने चेतावनी दी है कि अगर 1 नवंबर तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे. यहां तक कि उन्होंने शहीदों के मेडल और वर्दियां तक नीलाम करने की घोषणा कर दी है.from Latest News हरियाणा News18 हिंदी https://ift.tt/2QFYGRw

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